ट्रैन में भइल प्यार, खोजे खातिर बना दिहले फिल्म और लगइले 4000 पोस्टर।

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प्यार के कहानी सब लोग के अच्छा लागेला। लेकिन हमनी के समाज हमेशा से एकर खिलाफ रहल बा। दुनिया में हर केहु के एक ना एक बार प्यार जरूर होखे ला, लेकिन बहुते कम आदमी के ही ओकर सच्चा प्यार मिलेला। आज रउआँ लोगीं के जवन कहानी सुनावे जा तानी उ भलें हीं फिल्मी लागे लेकिन इ बिलकुल सांच हऽ।
कोलकाता के बेहला स्थित जोका के रहे वाला 29 वर्षीय विश्वजीत पोद्दार राज्य पर्यावरण विभाग में काम करेले। उनकर ऑफिस सल्टलेक में बा। 23 जुलाई के तारापीठ से बर्दवान खातिर एगो लोकल ट्रेन पकड़लन। ट्रेन रवाना खुले से ठीक पहिले एगो लईकी आपन माता-पिता के साथ ट्रेन में आके उनकर सामने वाला सीट पर बैठ गइली। उ लईकी के देखते ही विश्वजीत के प्यार हो गइल। उ लईकी भी बात करे के चाहत रहली, लेकिन कर ना पवली। उ आपन नंबर भी बतावे के कोशिश कइली लेकिन पोद्दार के समझ में ना आइल।


उ लईकी के खोजे खातिर पोद्दार 6 मिनट और 23 सेकंड के फिल्म बना दिहले और 4000 पोस्टर लगवा दिहले। पोस्टर में पोद्दार के मोबाइल नंबर के साथ उनकर फिल्म के यूट्यूब लिंक भी देहल रहे। फिल्म में पोद्दार उ लईकी के किरदार में आपन एगो फ्रेंड के रखले। फिल्म के अंत में पोद्दार स्टेशन पर उ लईकी के इंतजार करते कहतारे कि अगर उ इ फिल्म के देखस त उनकरा से कॉन्टेक्ट करस। पोद्दार इ फिल्म के नाम ‘कोन्ननगर कोने (कोन्ननगर की दुल्हन)’ रखले बारे।
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