हौसलों की उड़ान।

By


बिहार के मुजफ्फरनगर जिले के आनंदपुर गांव की राजकुमारी देवी को लोग किसान चाची के नाम से जानते हैं। इस नाम के पिछे जो कहानी है ओ अब मैं आपको बताता हूं।
नब्बे के दशक में किसान चाची के सामने जीवन यापन की समस्या थी। वक्त ऐसा भी आया कि पति से अलग रहना पड़ा। उनके पास कुछ जमीन थी वही एक सहारा था। लेकिन किसान चाची के मन में अजब हौसला था। सबसे पहले यही सोचा कि सब्जी उगाकर जीवन चलाऊंगी। थोड़ी बहुत जानकारी लेकर वह इस काम में जुट गई। सब्जी होने लगी। पपीता भी उगा। इससे जीवन थोड़ा संभला। फिर उन्हें लगा कि क्यों न सब्जी का अचार बनाया जाए। यह फार्मूला काम कर गया। किसान चाची के अचार में कुछ खास बात थी। बडे बड़े ब्रांडो को छोडकर लोग इसे अपनाने लगे।


कारोबार बढ़ने लगा तो उन्होंने महिला समूह तैयार किए। वह साइकिल पर जाकर अपने अचार की ब्रिकी करती थी। लेकिन महिलाओं के समूह से तो यह मेहनत रंग लाई। आज उनके पास चालीस सहायता समूह है। उनकी तपस्या का फल है कि कई परिवार इससे चल रहे हैं। उनके हुनर का डंका चारों ओर बजने लगा।
किसान चाची पर फिल्म भी बनी है। आज की रात है जिंदगी ग्रैंड फिनाले में वह टीवी के पर्दे पर अमिताभ बच्चन के साथ नजर आई। किसान चाची को कुछ प्रतिष्ठित अवार्ड मिल चुके हैं। कई संस्थाएं विश्वविद्यालय उन्हें अपने यहां आमंत्रित करना चाहते हैं लेकिन उनका कहना है कि अचार से फुर्सत मिले तब तो जाएं। हाल में देहरादून में यूथ आइकन अवार्ड में भी किसान चाची आई थी। अपनी सीधी सच्ची बातों से उन्होंने श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। देर तक तालिया बजती रही।

आगे पढ़ी : रेलवे ग्रुप डी के आवेदन केतना जाना के भइल रद्द, इहाँ चेक करीं आपन आवेदन।

You Might Like These

Leave a Comment