जब दूसरे देशों को सभ्यता का मतलब नही मालूम था तब नालंदा में वैज्ञानिक शोध होता था

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जब दूसरे देशों को सभ्यता का मतलब नही मालूम था तब नालंदा में वैज्ञानिक शोध होता था


आज जब बिहार के शिक्षा प्रणाली को लेके सवाल उठते हैं तो बहुत दुख होता है। क्योंकि हम वही हैं जिनके पूर्वजो ने नालंदा जैसे यूनिवर्सिटी की स्थापना की थी। नालन्दा में शिक्षा का स्तर का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ पे सैकड़ो छात्र विदेशो से आके रहते थे और पढ़ते थे। शिक्षा की प्रणाली वैदिक थी और गुप्त साम्रज्य में विश्विद्यालय का बहुत विकाश हुआ। ह्वेनसांग जैसे पर्यटकों के अपने किताबो में नालंदा का बहुत गुणगान किया है। यह वर्षो तक छात्र रह के पढ़ते थे। लगभग 21000 छात्रों के रहने और खाने की बहुत अच्छी व्यवस्था थी। महावीर जैन और गौतम बुद्ध दोनो ने नालंदा में कुछ समय व्यतीत किया था। आर्यभट्ट यह के सबसे प्रतिभाशाली छात्रों में से एक थे।

Source IUCAA पुणे में आर्यभट्ट की मूर्ति।

आर्यभट्ट की विज्ञान के क्षेत्र में उपलब्धियां अनमोल है। नालंदा में विभिन्न शिक्षक और छात्रों ने कई विषयों पे शोध और खोज किये, उनमें से ज्यादातर खो चुके हैं। और उनको बारे में जानकारी भी कम हैं। नालन्दा का पुस्तकालय भी बहुत मशहूर है।

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बाद में पूर्व राष्ट्रपति श्री अब्दुल कलाम के प्रयासों से नालंदा को फिर से शुरू करने की कोशिश की गई। नालन्दा विश्विद्यालय फिर से बिहार के राजगीर में स्थापना कार्य शुरू हुआ और नोबल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन इसका नेतृत्व कर यह हैं।

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