बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित डेढ़ लाख वर्ष पुराना उमगा सूर्य मंदिर।

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औरंगाबाद से 18 किलोमीटर दूर देव में स्थित एक ऐसा सूर्य मंदिर है, जिसका दरवाजा पश्चिम की ओर है। उमगा सूर्य मंदिर स्थापत्य और वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण है। करीब सौ फीट ऊंचा यह सूर्य मंदिर काले और भूरे पत्थरों की नायाब शिल्पकारी से बना है। मंदिर में सात रथों से सूर्य की मूर्तियां अपने तीनों रूपों उदयाचल (सुबह) सूर्य, मध्याचल (दोपहर) सूर्य और अस्ताचल (अस्त) सूर्य के रूप में मौजूद है।
ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण डेढ़ लाख वर्ष पूर्व भगवान विश्वकर्मा ने एक रात में की थी।


इस मंदिर के बारे में एक और मान्यता हैं कि एक राजा एक बार देव इलाके के जंगल में शिकार खेलने गए थे। शिकार खेलने के समय उन्हें प्यास लगी, तो उन्होंने अपने आदेशपाल को लोटा भर पानी लाने को कहा। आदेशपाल पानी की तलाश करते हुए एक पानी भरे गड्ढे के पास पहुंचा। वहां से उसने एक लोटा पानी लेकर राजा को दिया। राजा के हाथ में जहां-जहां पानी का स्पर्श हुआ, वहां का कुष्ठ ठीक हो गया। बाद में राजा ने उस गड्ढे में स्नान किया और उनका कुष्ठ रोग ठीक हो गया। उसके बाद उसी रात जब राजा रात में सोए हुए, तो सपना आया कि जिस गड्ढे में उन्होंने स्नान किया था, उस गड्ढे में तीन मूर्तियां हैं। राजा ने फिर उन मूर्तियों को एक मंदिर बनाकर स्थापित किया।
आये वाला 4-5 महीना में राजगीर और भी आकर्षक हो जाई।

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