गोपालगंज (बिहार) के गांव सदियों से कर रहल बा पर्यावरण के रक्षा।

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गोपालगंज (बिहार) के गांव सदियों से कर रहल बा पर्यावरण के रक्षा।


भारत के संस्कृति दुनिया के सबसे पुराना और समृद्ध संस्कृति के रूप में मानल जाला। बहुत सारा अइसन नियम और परंपरा बा, जो हमलोग के पूर्वज से लेके आज तक चलल आ रहल बा। एमे से अधिकतर परंपरा के कुछ न कुछ वैज्ञानिक महत्व रहेला। जैसे कि पेड़ के पूजा। भारत के संस्कृति में पेड़ के तुलना देव से कईल बा। यहि कारण बा कि आज भी गाँव मे पेड़ के पूजा कईल जाला। अइसन ही एक गांव बा बिहार के गोपालगंज ज़िला के थावे खंड के विशम्भरपुर। धतींगना पंचायत के ई गांव में सदियों से घर के सामने पेड़ लगावे के परम्पार चलल आ रहल बा। 150 परिवार वाला ई गांव में कुल 3000 लोग रहे ला और लगभग 20000 से ज्यादा पेड़ बा। ई छोटा सा गांव के हरियाली देख के मन प्रसन्न हो जाई। चारो तरफ आम, पीपल, कदम जैसन हज़ारो पेड़। चाह केतना भी गर्मी के मौसम होवे, छायादार और हवादर जगह के कमी न होई। यहां के हर एक व्यक्ति संकल्पबद्ध बा, पर्यावरण के रक्षा खातिर।

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